Saturday, 12 August 2017

बिरसा मुंडा जीवनी

पूरा नाम
बिरसा मुंडा
जन्म
जन्म भूमि
मृत्यु
9 जून, 1900 ई.
मृत्यु स्थान
राँची जेल
अभिभावक
सुगना मुंडा
नागरिकता
भारतीय
प्रसिद्धि
क्रांतिकारी
विशेष योगदान
बिरसा मुंडा ने अनुयायियों को संगठित करके दो दल बनाए। एक दल मुंडा धर्म का प्रचार करता था और दूसरा राजनीतिक कार्य।
अन्य जानकारी
कहा जाता है कि 1895 में कुछ ऐसी आलौकिक घटनाएँ घटीं, जिनके कारण लोग बिरसा को भगवान का अवतार मानने लगे। लोगों में यह विश्वास दृढ़ हो गया कि बिरसा के स्पर्श मात्र से ही रोग दूर हो जाते हैं।
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बिरसा मुंडा (जन्म- 15 नवम्बर, 1875 ई., राँची, झारखण्ड; मृत्यु- 9 जून, 1900 ई., राँची जेल) एक आदिवासी नेता और लोकनायक थे। ये मुंडा जाति से सम्बन्धित थे। वर्तमान भारत में रांची और सिंहभूमि के आदिवासी बिरसा मुंडा को अब 'बिरसा भगवान' कहकर याद करते हैं। मुंडा आदिवासियों को अंग्रेज़ों के दमन के विरुद्ध खड़ा करके बिरसा मुंडा ने यह सम्मान अर्जित किया था। 19वीं सदी में बिरसा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक मुख्य कड़ी साबित हुए थे।
जन्म तथा शिक्षा
बिरसा मुंडा का जन्म 1875 ई. में झारखण्ड राज्य के राँची में हुआ था। उनके पिता, चाचा, ताऊ सभी ने ईसाई धर्मस्वीकार कर लिया था। बिरसा के पिता 'सुगना मुंडा' जर्मन धर्म प्रचारकों के सहयोगी थे। बिरसा का बचपन अपने घर में, ननिहाल में और मौसी की ससुराल में बकरियों को चराते हुए बीता। बाद में उन्होंने कुछ दिन तक 'चाईबासा' के जर्मन मिशन स्कूल में शिक्षा ग्रहण की। परन्तु स्कूलों में उनकी आदिवासी संस्कृति का जो उपहास किया जाता था, वह बिरसा को सहन नहीं हुआ। इस पर उन्होंने भी पादरियों का और उनके धर्म का भी मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। फिर क्या था। ईसाई धर्म प्रचारकों ने उन्हें स्कूल से निकाल दिया।
लोगों का विश्वास
इसके बाद बिरसा के जीवन में एक नया मोड़ आया। उनका स्वामी आनन्द पाण्डे से सम्पर्क हो गया और उन्हें हिन्दू धर्मतथा महाभारत के पात्रों का परिचय मिला। यह कहा जाता है कि 1895 में कुछ ऐसी आलौकिक घटनाएँ घटीं, जिनके कारण लोग बिरसा को भगवान का अवतार मानने लगे। लोगों में यह विश्वास दृढ़ हो गया कि बिरसा के स्पर्श मात्र से ही रोग दूर हो जाते हैं।
प्रभाव में वृद्धि
जन-सामान्य का बिरसा में काफ़ी दृढ़ विश्वास हो चुका था, इससे बिरसा को अपने प्रभाव में वृद्धि करने में मदद मिली। लोग उनकी बातें सुनने के लिए बड़ी संख्या में एकत्र होने लगे। बिरसा ने पुराने अंधविश्वासों का खंडन किया। लोगों को हिंसा और मादक पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी। उनकी बातों का प्रभाव यह पड़ा कि ईसाई धर्म स्वीकार करने वालों की संख्या तेजी से घटने लगी और जो मुंडा ईसाई बन गये थे, वे फिर से अपने पुराने धर्म में लौटने लगे।
गिरफ़्तारी
बिरसा मुंडा ने किसानों का शोषण करने वाले ज़मींदारों के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा भी लोगों को दी। यह देखकर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें लोगों की भीड़ जमा करने से रोका। बिरसा का कहना था कि मैं तो अपनी जाति को अपना धर्म सिखा रहा हूँ। इस पर पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार करने का प्रयत्न किया, लेकिन गांव वालों ने उन्हें छुड़ा लिया। शीघ्र ही वे फिर गिरफ़्तार करके दो वर्ष के लिए हज़ारीबाग़ जेल में डाल दिये गये। बाद में उन्हें इस चेतावनी के साथ छोड़ा गया कि वे कोई प्रचार नहीं करेंगे।
संगठन का निर्माण
परन्तु बिरसा कहाँ मानने वाले थे। छूटने के बाद उन्होंने अपने अनुयायियों के दो दल बनाए। एक दल मुंडा धर्म का प्रचार करने लगा और दूसरा राजनीतिक कार्य करने लगा। नए युवक भी भर्ती किये गए। इस पर सरकार ने फिर उनकी गिरफ़्तारी का वारंट निकाला, किन्तु बिरसा मुंडा पकड़ में नहीं आये। इस बार का आन्दोलन बलपूर्वक सत्ता पर अधिकार के उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ा। यूरोपीय अधिकारियों और पादरियों को हटाकर उनके स्थान पर बिरसा के नेतृत्व में नये राज्य की स्थापना का निश्चय किया गया।
शहादत
24 दिसम्बर, 1899 को यह आन्दोलन आरम्भ हुआ। तीरों से पुलिस थानों पर आक्रमण करके उनमें आग लगा दी गई। सेना से भी सीधी मुठभेड़ हुई, किन्तु तीर कमान गोलियों का सामना नहीं कर पाये। बिरसा मुंडा के साथी बड़ी संख्या में मारे गए। उनकी जाति के ही दो व्यक्तियों ने धन के लालच में बिरसा मुंडा को गिरफ़्तार करा दिया। 9 जून, 1900 ई. को जेल में उनकी मृत्यु हो गई। शायद उन्हें विष दे दिया गया था। लेकिन लोक गीतों और जातीय साहित्य में बिरसा मुंडा आज भी जीवित हैं।

Friday, 17 February 2017

पिता के आंखें भर आएंगी

एक पिता का प्यार अपनी बेटी के लिए:-   
मेरा बेटा तब तक मेरा है जब तक उसकी शादी न हो जाती और मेरी बेटी तब तक मेरी है जब तक मेरी मौत न हो जाती। पिता के लिए उसकी बेटी जितनी खास,जितनी स्पेशल होती है,उतना ही बेटी के लिए पिता भी खास होते हैं। दोनों के बीच की प्यार का कोई सीमा नहीं है। बेटी के पैदा होने से लेकर शादी करके उसकी विदाई करने तक एक पिता जितनी यादें बेटी के साथ बनाता है, उस हर एक लम्हे को याद करके वह आंसू भी बहाता है।इसीलिए  किसी ने कहा है की  हर  व्यक्ति  के  100  भाग्य  होते  है । पर  उन  100  भाग्यों  में  से  जब  1  भाग्य  अच्छा  होता  है  तब  उन  के  घर  पर  'लड़के'  का  जन्म  होता  है और जब  100  के  100  भाग्य  अच्छे  होते  तब  उन  के  घर  पर  'लड़की'  का  जन्म  होता  है ।इसीलिए  ऐसा  कहा  जाता  है  की, लड़का  तो  'भाग्य'  से  होता  है लेकिन  लड़की  'सौभाग्य'  से  होती  है । बेटी है तो कल है पराया धन होकर भी कभी पराई नही होती। शायद इसीलिए किसी बाप से हंसकर बेटी की, विदाई नही होती।"

***"हर बेटी के भाग्य में पिता होता है,पर हर पिता के भाग्य में, बेटी नही होती"***

Friday, 13 January 2017

जीवन का एक सच

इन्सान अपनी ईच्छाओं का त्याग करता है, और पुरी जिन्दगी नौकरी, ब्यपार और धन कमाने में बिता देता है। 60 वर्ष की ऊम्र के बाद, जब वो रिटायर्ड {Retired} होता है तो उसे उसका फन्ड {Funds} मिलता है। या बैंक  बैलेंस  होता हैं  तब तक जीवन  बदल चुकी होती है, परिवार को चलाने वाले बच्चे आ जाते हैं क्या इन बच्चों को इस बात का अन्दाजा लग पायेगा की इस फन्ड, या बैंक बैलेंस के लिये, कितनी इच्छायें अधूरी रही होगी हैं?, कितनी तकलीफें झेली होंगी ?,कितनें सपनें अधूरे रहे होंगे?  अपनी सारी जिन्दगी घर से बाहर रहकर पैसे कमाने में लगा दी और जब वह कुछ करने लायक नहीं रहे तो अपने घर वापस आ जाते हैं। ऐसे पैसे किस काम के जिसे पाने के लिये पूरी जिन्दगी लगाई जाय और उसका इस्तेमाल खुद न कर सके। “इस धरती पर कोई ऐसा आमीर अभी तक पैदा नहीं हुआ जो बीते हुए समय को खरीद सके।"हमेशा सकारात्मक सोच रखें और अपनी जीवन को अपनी तरह से अपने अंदाज में जियें। ------ये सब मैं ने कही पढ़ा था   

ये मेरा सोच है----"आपके के लिए कोई क्या सोचता हैं ये कोई मायने नही रखता हैं 
                           लेकिन आप आपने बारे में क्या सोचते ये मायने रखता है" 

Saturday, 31 December 2016

जीवन एक ऐसी मंजिल है

जीवन एक ऐसी मंजिल है जिस पर चलने के लिए किसी न किसी की जरुरत होती है फिर चाहे वह आपका कोई दोस्त हो या पत्नी हो.
ज़िंदगी बहुत छोटी  है। इसका एक-एक पल अनमोल है। यह खूबसूरत समय दोबारा मिले ना मिले। इससे पहले कि देर हो जाए, जीवन का आनंद उठाना शुरू कर दीजिए। अपनी छोटी- छोटी सफलताओं पर खुशियाँ मनाए। निजी जीवन और Professional जीवन में संतुलन बनाए रखिए। परिवार के लिए वक्त निकालिए। सफलता में अच्छी सेहत, जीवन के लिए ऊर्जा अच्छा होने का एहसास और मन की शांति हो आखिर, "संतुलन बनाने का नाम ही तो ज़िंदगी है।" जो जितनी कुशलता से यह संतुलन बना लेता है, जीवन में वह उतना ही सफल और प्रसन्न रहता है। यदि  ऐसा करने में सफल होते हैं तो आपकी तमाम समस्याएं, समस्या नहीं रहेंगी। आप में मुस्कराते हुए उसका सामना करने की शक्ति आ जाएगी। जीवन खुशियों से भर जाएगा। आपको अधिक संतुष्टि और आत्म सम्मान मिलेगा




Sunday, 24 March 2013

जीवन के मन्त्र !!

पत्नी दिन-रात एक करके पति  को ईमानदारी और समर्पण से संभालती है पत्नी की  पसंद-नपसंद का ख्याल रखना, उसे खुश रखना पति का कर्तव्य है।
जब भी पत्नी   कुछ बात कर रही हो तो  पति  कितने भी व्यस्त क्यों न हों,  कुछ काम छोड़ उसकी बातो को  ध्यान से सुनें। पत्नी -पति  का ध्यान चाहती है। लेकिन पति -पत्नी की बात पर ध्यान देने की बजाय टीवी देखने में मग्न या किसी अन्य काम में डूबे रहते हैं। इससे पत्नी को महसूस होता है कि  पति उसकी परवाह नहीं करते हैं।

** इसलिए चाहिए की पति क्या करे और क्या न करे !!

1. ऑफिस से घर आकर पत्नी  पूछें कि आपका  दिन कैसे बीता और  क्या किया ताकि उन्हें लगे कि पति को उनकी  फिक्र रहती है।
2. ऑफिस से लौटने में देर हो सकती है तो पत्नी को  जरूर फोन कर दें ताकि वह चिंता न करती रहे।
3. सप्ताह में कम से कम एक बार उसे बाहर घुमाने ले जायें।
4. समय-समय पर पत्नी  को छोटे-छोटे उपहार देते रहें।
5. पत्नी  की जन्म दिन  कभी न भूलें।
6. परिवार वालो  को महत्ता दें पर पत्नी की उपेक्षा न करें। दोनों के बीच एक संतुलन बनाए रखें।
7.  रिश्ते में थोड़ी-बहुत तकरार होती है। तकरार के समय को  समझदारी से निपटें ताकि तकरार इकरार बन जाए।
***** वैवाहिक जीवन में एक -दूसरे को समझने की बहुत आवश्यकता होती है इसलिए सहन करना, माफ करना, भूल जाना और क्रोधित न होना ही जीवन को अच्छा  बनता है *****

Saturday, 9 March 2013

प्यार जिंदगी है

प्यार जिंदगी है
मै भी किया बचपन से ले कर आज तक प्यार, पता है प्यार अँधा होता है ,एक  माँ  अपने बेटे से  करती है और फिर वही बेटा  अपनी  पत्नी से,फिर वही पत्नी उसके बेटे से...बड़ा अजीब लगता है  सुनने में,  प्यार क्या होता है?  जिसे प्यार करो उसकी फ़िक्र  होती है, उसकी चिंता होती है , उसकी बहुत याद आती है  ,प्यार को तो महसूस किया  जाता है , प्यार कभी भी एक तरफ प्यार नही होता ,सामने वाला भी आपसे उमीद करता की आप भी बदले में उसे तोड़ा बहुत प्यार दे, उसकी भावनाओ की काद्रा करे , उसे समझे , उसके साथ हर सुख और दुख बाटे ,जिंदगी में  उसका साथ दे ,एक दूसरे के लए जीने का मक़सद बने ,एक दूसरे के हम सफ़र बने ,
जब दो दिल आपस मे मिलते है तो  जिंदगी बहुत अच्छी लगने लगती है, सफलता  कदम चूमने लगते  है,एक दूसरे के लए प्रेरणा स्त्रोत  बनते हैं ये होता है सच्चा प्यार..

***किसी  से इतना प्यार या  दिल नही लगाना चाहिए की , उसके बिना जी ना सके और  जिंदगी बेकार हो जाए, ***


लेकिन  आज क्या हो रहा है एक दुसरे पर सक करते है और रिश्ता सिर्फ मतलब के लिए रहा जाता है ???

Monday, 18 February 2013

प्यार

यह प्यार ऐसी चीज है जो कभी भी हो जाता है. प्यार की इसी बिमारी की वजह से  इसे सबसे खराब मर्ज कहते हैं. यह प्यार दर्द देता है तो दवा भी खुद ही करता है. बड़ा अजीब है ना. लेकिन क्या करें प्यार एक ऐसी बिमारी है जिससे सभी दूर तो रहना चाहते हैं लेकिन ऐसा कोई नहीं है जो इस बिमारी में पड़ना भी नहीं चाहता. सभी जानते हैं कि यह आग का दरिया है लेकिन इस आग के दरिए में भी सभी नंगे पांव ही चलना चाहते हैं.


 यह प्यार कभी कहीं भी हो सकता है तो इसलिए जरूरी है कि इस प्यार को महसूस किया जाए. कभी स्कूल के समय में प्यार हुआ है, या फिर ट्यूश्न में किसी लड़की पर क्रश हुआ है. कई बार ऐसा होता है कि हमें प्यार तो हो जाता है लेकिन हम उस प्यार को पहचान नहीं पाते.


वह शुरूआत है जो इंसान को एक लंबे समय तक उसके दिल में सुखद  अहसास की तरह रहती है. कई बार   कह पाते हैं कि उन्हें किससे प्यार है लेकिन बहुत से लोग नहीं कह पाते.

 स्कूल में प्यार: अक्सर दुनिया के 90 प्रतिशत प्यार के बीज स्कूलों में ही फूटते हैं. वैसे स्कूल में होने वाला प्यार बहुत हद तक मात्र आकर्षण का नाम होता है लेकिन एक बात याद रखिए कि यही प्यार है जो बिना किसी स्वार्थ के होता है.
ट्यूशन में प्यार: ट्यूशन में यूं तो लोग एक्सट्रा पढ़ाई के लिए जाते हैं लेकिन इस एक्सट्रा के अंदर एक अहम चीज प्यार भी ना जानें कब जुड जाती है पता ही नहीं चलता. ट्यूशन में आने वाली लड़की के घर का पता लगाना उसका फोन नंबर पता करना आदि ऐसी निशानियां हैं
राह चलते दिखे जब कोई: राह चलते  ना जानें कितने चेहरों को देखते हैं इनमें से बहुत कम ही होते हैं जिनकी परछाई हमारे दिमाग में बैठ जाती है. दिल में बार बार यह आवाज उठती है कि काश किसी तरह किसी बहाने इससे बात हो जाए.

Tuesday, 22 January 2013

जीवन का सच

जीवन एक प्यारा बंधन है । हमने अक्सर देखा है की लोग बहुत जल्दी ही मुस्किलो से हार जाते है । अगर जीवन में मुस्किल न हो तो जीवन  किस काम का आख़िर जिन्दगी का असली मजा तो तभी आता है जब हम मुस्किलो का सामना करते हुए आगे बढ़ते है । कितने प्यार से भगवान ने इस संसार को बनाया फिर उसने हम  लोगो बनाया , प्यार  सबसे अच्छा रिश्ता  है जो  समस्त मानवजाति को जोड़े रखा है

दोस्त और  दुश्मन को कभी विस्वास दिलाने की ज़रूरत नही होती है

क्योंकि दुश्मन कभी यकीन नही करेगा, और दोस्त कभी शक नही करेगा

 जब में किसी को दुखी देखता हूँ  तो मुझे बहुत दुःख होता की आख़िर कोई दुखी क्योँ होता है आख़िर दुखी होने से क्या हमें हमारे प्रश्नों  का उत्तर मिल जाता है । जबकि हम जानते है की हर प्रसन का उत्तर होता है ।

Sunday, 1 July 2012

जीवन एक यात्रा है और हम सब यात्री !

नमस्ते ! मै सुरेन्द्र !
जीवन एक यात्रा है और हम सब यात्री !
इस यात्रा में यात्री मिलेंगे कुछ दोस्त बन कर यात्रा पूरा करेंगे तो कुछ एक छोटी सोच को लेकर मतलब झगड़कर के लेकिन यात्रा तो सब का पूरा होता है यात्रा के बाद जो बदलाव होता है वो होता है जीवन में की गयी कमाई ! जब हम यात्रा में बस दो पल के लिए एक दुसरे से मिलते है तो फिर हम दोस्त बन कर कियो नहीं रह सकते है इस दो पल में
क्योकि आज जरूरत है दोस्त बन के रहने की,  झगड़कर किसी का उनती नहीं हो सकता है

 
जीवन की इस यात्रा में सब से दोस्त बन के मिलो दोस्त बनाने से किसी को किसी तरह का समस्या नहीं होता है हर एक नए दोस्त एक नयी जीवन का बिचार देता है एक बिछड़ता दोस्त आनुभव देता है लेकिन कपटी दोस्त सीख !

"किसी ब्यक्ति का संस्कार ही दिखता है  समाज में की कोन कितना अच्छा है"

Wednesday, 2 May 2012

खुदा की नेमत !

जिंदगी
प्यार जैसा खूबसूरत अहसास हर किसी की जिंदगी को कुछ स्पेशल बना देता है. जब दो चाहने वाले एक-दूसरे से अपनी भावनाओं का इजहार करते हैं.

हालांकि इस दौड़ भाग की जिंदगी में हमें एक दूसरे के साथ बिताने के लिए वक्त ही नहीं मिल पाता,ऐसे समय में हमें चाहिए कि हम छोटी छोटी चीजों में खुशियां ढूंढे और अपने हमसफर को खुश रखने की कोशिश करें. 

यदि प्यार की लंबी जिंदगी चाहते हैं तो कभी भी ऐसा वादा न करें, जो पूरा न कर पाएँ अन्यथा ये  संबंधों में दरार डाल सकता है। जब  समय अच्छा हो तो  किसी भी तरह का कोई वादा कर लेते हैं लेकिन हो सकता है कि जो वादा  प्रिय से कर रहे हैं, किसी कारण से उसे पूरा न कर पाएँ। इसलिए जहां तक हो सके वादा न ही करें।

और फिर प्यार तो प्यार है, खुदा की सबसे बड़ी नेमत...यहाँ कहाँ किसी वादे या वादाखिलाफी के लिए कोई जगह है। अगर यहाँ कुछ है तो सिर्फ मोहब्बत....।  

Friday, 23 December 2011

थोड़ी देर में


सच्चा प्रेम व्यक्ति को बहुत मुश्किल से मिलता है लेकिन अगर किसी के जीवन में सच्चे प्रेमी का अगमन हो जाता है तो इससे बेहतर और कुछ नहीं है लेकिन वर्तमान हालातों में सच्चा प्रेम जैसी परिस्थितियां बन पाना थोड़ा कठिन हो गया है देखा जाता है कि युवा अपने आकर्षण को ही प्रेम संबंध मानकर साथ जीने-मरने की कसमें खा लेते हैं कुछ समय तो सब कुछ ठीक चलता है लेकिन बाद में सुनहरे सपने बेमानी लगने लगते हैं. जैसे-जैसे आकर्षण समाप्त होने लगता है या कोई बेहतर विकल्प दिखाई देता है तो दोनों में से एक अपने संबंध के प्रति लापरवाह हो जाता है इसके पीछे उसका उद्देश्य जल्दी से जल्दी संबंध और साथी से छुटकारा पाना होता है.

संबंध को समाप्त करने से पहले वह एक बार भी दूसरे के विषय में नहीं सोचता है लेकिन अपने संबंध को लेकर जो व्यक्ति सच में प्रेम करता है वह कभी संबंध विच्छेद को सहन नहीं कर पाता और उसके समीप रहने का हर संभव प्रयत्न करता है.

Thursday, 3 November 2011

प्यार और दर्द


प्यार और दर्द दो ऐसे पहलू हैं जो एक साथ रहते हैं क्योंकि जहां प्यार वहां तकरार और जहां तकरार वहां झगड़ा और दर्द. लेकिन क्या आपको पता है कि अगर आप किसी के प्यार में तीव्र और आवेशपूर्ण भावनाओं और दर्द को अनुभव करते हैं तो ऐसी स्थिति में शायद एक डॉक्टर या दवाई आपके दर्द को कम नहीं कर सकती क्योंकि प्यार तो वह पानी की धारा है जो स्वयं अमृत समान है और अमृत को दवाई की क्या ज़रूरत. प्यार में उत्पन्न दर्द को स्वयं प्यार ही ठीक कर सकता है.

“”यह कुछ मायकुनों में एक लत की तरह लगता है, और प्यार से भी दर्द का इलाज हो सकता है.”

Friday, 29 April 2011

सिर्फ मोहब्बत............सुरेन्द्र

आज की तेज रफ्तार से दौड़ती जिन्दगी में व्यक्ति जब एक-दूसरे को पीछे धकेलते हुए आगे बढ़ने की होड़ में चला जा रहा है, रिश्तों और एहसासों से दूर,सुख खोजने के प्रयास में लगा रहता है, ऐसी स्थिति में जहाँ प्यार बैंक-बैलेंस और स्थायित्व देखकर किया जाता है, वहाँ सच्ची मोहब्बत, पहली नजर का प्यार और प्यार में पागलपन जैसी बातें बेमानी लगती हैं । प्रेम सोच-समझकर की जाने वाली चीज नहीं है। कोई कितना भी सोचे, यदि उसे सच्चा प्रेम हो गया तो उसके लिए दुनिया की हर चीज छोटी हो जाती है। प्यार कब हो जाता है, पता ही नहीं चलता। इसका एहसास तो तब होता है, जब मन सदैव किसी का समीप चाहने लगता है। उसकी मुस्कुराहट पर खिल उठता है। उसके दर्द से तड़पने लगता है।
प्यार और दर्द में गहरा रिश्ता है। जिस दिल में दर्द ना हो, वहाँ प्यार का एहसास भी नहीं होता। किसी के दूर जाने पर जो खालीपन लगता है, जो टीस दिल में उठती है, वही तो प्यार का दर्द है।
किसी के खयालों में खोकर खुद को भुला देना, उसके सभी दर्द अपना लेना, स्वयं को समर्पित कर देना, उसकी जुदाई में दिल में एक मीठी चुभन महसूस करना, हर पल उसका सामीप्य चाहना, उसकी खुशियों में खुश होना, उसके आँसुओं को अपनी आँखों में ले लेना, हाँ यही तो प्यार है। इसे महसूस करो और खो जाओ उस सुनहरी अनोखी दुनिया में, जहाँ सिर्फ शांति है।
प्रेम में नकारात्मक सोच के लिए कोई जगह नहीं होती। जो लोग प्यार में असफल होकर अपने प्यार को नुकसान पहुँचाने का कार्य करते हैं, वे सच्चा प्यार नहीं करते।........... सुरेन्द्र

Tuesday, 21 December 2010

तुम्हे कैसे भुला दू ?



तुम्हे भूलना मजबूरी हैं मेरी

जीतकर भी हारना कमजोरी हैं मेरी 

सोचता हु क्या नाम दू इसे 

मरने से भी बत्तर, ये जो ज़िन्दगी है मेरी !

रिश्ते और नाते अब सब सपने से लगते है

बेगानो से न जाने अब आप अपने क्यों लगते है

डर है कही अपने आप को न खो दू 

 अपने भी अब अजनबी से लगते है

Sunday, 19 September 2010

लड़कियों की तकलीफ आवारा बादल के जैसा होता है ?


एक बेहद कड़वा सच जिसे कोई मानना नही चाहता ! शायद हमें अपनी निगाह में ख़ुद गिर जाने का डर, इसे याद न रखने को विवश करता है !

17-18 साल की होते होते, माँ बाप सोचने लगते हैं कि १-२ साल में गुडिया के विवाह के बाद यह खर्चा तो कम हो ही जाएगा ! उस गुडिया के कमरे पर, कब्ज़ा करने की कईयों की इच्छा, ख़ुद माँ का यह कहना कि गुडिया के शादी के बाद, यह कमरा खाली हो जाएगा, इसमे बेटा रह लेगा, किताबों को बाँध के टांड पर रख दो और स्टडी टेबल अपने भाई के बेटे को देने पर, इस कमरे में जगह काफी निकल आयेगी !

यह वही बेटी थी, जो पापा की हर परेशानी की चिंता रखती और हर चीज समय से याद दिलाती थी, उसके पापा को कलर मैचिंग का कभी ध्यान नही रहता, इस पर हमेशा परेशान रहने वाली लडकी, सिर्फ़ 18 साल की कच्ची उम्र में, सबको इन परेशानियों से मुक्त कर गयी !

यह वही बहन थी जो पूरे हक़ और प्यार के साथ, खिलखिला खिलखिला कर, अपने भाई के जन्मदिन की तैयारी पापा, माँ से लड़ लड़ कर, महीनों पहले से करती थी ! रात को ठीक 12 बजे पूरे घर की लाइटें जला कर हैप्पी बर्थडे की धुन बजाने वाली लडकी, एक दिन यह सारी उछल कूद छोड़कर, गंभीरता का दुपट्टा ओढाकर विदा कर दी गयी .....और साथ में एक शिक्षा भी कि अब बचपना नहीं, हर काम ढंग से करना ऐसा कुछ न करना जिसमे तुम्हारे घर बदनामी हो !

कौन सा घर है मेरा ... ?? नया घर जहाँ हर कोई नया है, जहाँ उसे कोई नही जानता या वह घर, जहाँ जन्म लिया और 17-18 साल बाद विदा कर दी गयी ! जिस घर से विदाई के बाद, वहां एक कील ठोकने का अधिकार भी उसे अपना नही लगता ! और जिस घर को मेरा घर.. मेरा घर.. कहते जबान नही थकती थी उस घर से अब कोई बुलावा भी नही आता ! क्या मेरी याद किसी को नही आती... ऐसा कैसे हो सकता है ? फिर मेरा कौन है ... उस बेटी के पास रह जाती हैं दर्द भरी यादें ... और अब वही बेटी, अपनी डबडबाई {आंसू भरी } ऑंखें छिपाती हुई, सोचती रहे ...

किस घर को अपना बोलूं ?
मां किस दर { घर } को अपना मानूं
भाग्यविधाता ने क्यों मुझको जन्म दिया है, नारी का !
बड़े दिनों के बाद आज भैया की याद सताती है
पता नहीं क्यों सावन में पापा की यादें आती है !

शादी के पहले दूसरे साल तक बेटी के घर त्योहारों पर कुछ भेंट आदि लेकर जाने के बाद, उस बच्ची की ममता और तड़प को भूल कर, अपनी अपनी समस्याओं को सुलझाने में लग जाते हैं ! कोई याद नही रखता अपने घर से विदा की हुई बच्ची को ! धीरे धीरे इसी बेटी को अपने ही घर में, मेहमान का दर्जा देने का प्रयत्न किया जाता है, और ड्राइंग रूम में बिठाकर चाय दी जाती है !

तुम सब भले भुला दो लेकिन मैं वह घर कैसे भूलूं ?
तुम सब भूल गए भइया ! पर मैं, वे दिन कैसे भूलूं ?
बड़े दिनों के बाद आज , उस घर की यादें आती हैं !
पता नहीं क्यों आज मुझे मां तेरी यादें आती हैं !

हम अपने देश की संस्कारों की बाते करते नही थकते है हम अपने घर के सबसे सुंदर और कमज़ोर धागे को टूटने से बचाने के लिए , उसकी सुरक्षा के लिए कोई उपाय नही करते ! आज आवश्यकता है कि बेटे से पहले बेटी के लिए वह सब दिया जाए जिसकी सबसे बड़ी हकदार बेटी है !

Friday, 10 September 2010

प्यार का हिस्सा !


पतंगा बार - बार जलता है
दिये के पास जाकर
फिर भी वो जाता है
क्योकि प्यार मर - मिटना भी सिखाता है

निराशा म्रत्यु के बराबर है
उम्मीद जीवन है बल्कि उम्मीद ही जींदगी है
जंहा जिंदगी है वंहा उम्मीद है
जंहा जींदगी भी नहीं इसलिए हमेशा आपने मन
में उम्मीद का दीप जलाकर रखना चाहिए


Friday, 20 August 2010

मेरा सोच


"साथ रहते -रहते यूही वक्त गुजर जाएगा
दूर होने के बाद कौन किसे याद आएगा

जी लो ये पल हम साथ है

कल का क्या पता वक्त कहाँ ले जाएगा"

Saturday, 15 May 2010

इश्क़


है चाहत इश्क़, यह प्यारा है इश्क़
सबब जीने का हमारा है इश्क़

दिलों में बसता है ढ़ूंढने से क्या हासिल
इस गोल सी दुनिया का किनारा है इश्क़

डूबते हो तिनका भी नज़र आए साहिल
अंधेरी राज में जलता हुआ तारा है इश्क़

दिल तो खोया हुआ है कब से इसके पहलू में
हमने इस दिल में जबसे उतारा है इश्क़

है चाहत इश्क़, यह प्यारा है इश्क़
सबब जीने का हमारा है इश्क़

तेरा बोला हुआ एक लफ्ज़ कयामत ला दे
और चाहत भरा पैगाम तुम्हारा है इश्क़

सिर्फ एहसास है पाकीज़ा खयालातों का
ये जाँ देकर भी जानेजाना गवांरा है इश्क़

कदम तो बढ़ते हैं सदा मंजिल के पाने को
कभी जीता कभी तक़दीर का मारा है इश्क़

है चाहत इश्क़, यह प्यारा है इश्क़
सबब जीने का हमारा है इश्क़

हम तो जाना इसे होटो से ही पढ़ लेते हैं
तेरे रूख्सार पर लिखा हुआ सारा है इश्क़

इसे बनाने में ज़रूर खुदा की मर्ज़ी है
अपने ईनाम से उसने ही सवांरा है इश्क़

ये एक पल नहीं सदियों में बनाया होगा
चीज़ दुनिया की नहीं आसमान से आया होगा
किसी अवतार ने फुर्सत से उतारा है इश्क़

है चाहत इश्क़, यह प्यारा है इश्क़
सबब जीने का हमारा है इश्क------------ 
- ये गजल  शाहनवाज़ सिद्दीकी साहब ने लिखा है

Friday, 12 February 2010

वैलेंटाइन पर बताएगी चिड़या कि कैसा पति मिलेगा...................सुरेन्द्र


क्या आप कुंवारी हैं और जानना चाहती हैं कि आपका होने वाला पति कैसा होगा? तो इस बार सुबह जाग कर खिड़की से बाहर का नजारा देखिए। जो चिड़िया सबसे पहले दिखेगी, उसी के आधार पर यह बताया जा सकेगा कि आपका विवाह कैसे व्यक्ति से होने वाला है। यह कोई कपोल-कल्पना नहीं, बल्कि रोमन और ग्रीक काल के चिड़ियों पर किए सदियों पुराने अध्ययन ऐसा दावा करते हैं। उनके मुताबिक वैलेंटाइन डे पर कुंवारी लड़की द्वारा देखी गई पहली चिड़िया उसके भावी पति के बारे संकेत करती है।

वरसेस्टरशायर के पर्यटन विशेषज्ञों ने यूरोपीय, मध्यकालीन अमेरिकी और देसी अमेरिकी लोक कथाओं के विशेषज्ञों की सलाह के बाद एक गाइड तैयार की है। इसमें विभिन्न पक्षियों को देखने के बाद भावी पति के कार्य क्षेत्र के बारे में बताया गया है। गाइड कहती है कि कुंवारी लड़कियों को वैलेंटाइन डे पर सुबह नदी के किनारे या ऐसी जगह जाना चाहिए जहां पर ढेरों पक्षी हों।

पक्षी वैज्ञानिक स्टीव ह्वाइटहाउस के अनुसार, 'मेरी पत्नी से मुलाकात भी पक्षियों को देखने के दौरान हुई थी।' जानिए क्या कहती है आपके लव बर्ड के बारे में क्या कहती है पक्षी विशेषज्ञों की गाइड :

कबूतर : शादीशुदा जिंदगी खुशहाल बीतेगी।

राबिन : उसकी आय का जरिया पानी से होगा यानी नेवी अधिकारी या मछुआरा।

गौरैया : जमीन से जुड़ा का काम करने वाला यानी किसान या पर्यावरणविद।

ब्लूबर्ड : दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला यानी हंसमुख।

कठफोड़वा : शादी होने की कोई संभावना नहीं।

बतख : उसके साथ आपका संबंध घरेलू और स्थायी होगा।

शिकारी चिड़िया, जैसे बाज या उल्लू : बिजनेसमैन, राजनीतिक या नेता होगा।

किंगफिशर : वह अपने जन्मस्थान पर लौटेगा।

ब्लैक बर्ड : वह धर्मार्थ या आध्यात्मिक कामों में शामिल होगा।

Friday, 29 January 2010

प्यार में जलना या जालना दोनों गलत है परन्तु प्यार में दुःख सहना ही पड़ता है ! मेरे दोस्त !


मैने प्यार का एक दिया जलाए है, क्या खूब सुलगता है
हम तुम चाहे जल भी जाए, ये दिया सदा सुलगता रहे
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इश्क़ में तेरी ये कैसी जुदाई है आई
वक़्त की ये है कैसे रुसवाई
हवओ का आँधी में रूप बदला कैसे
ये बिन बदल बरसात सनम पे आई कैसे
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इश्क़ मैं तूने दुनिया गावा दी, ये चीज़ अजब निराली है
इश्क़ किया है तो जान हाथले पे रख ले, ये ज़ंग निराली है
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हमने आप को दोस्त समझा, पाय किया, साथ दिया
जो बन पड़ा वो सब किया, पर बेवफ़ाई का आपने सिला दिया
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आप नियत ने बर्बाद किया इस समा को, आप ने दुखाया उनकी वफ़ा को
आप क्या सिला देंगे, ए! बेरहम, आप ने रुलाया बहुत मासूमो को
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दिलासा तूने जो दिया न होता, तो हम आपना जीना दुशवर कर देते
तनहाई में जे जे के इस्कदर, हम तो आपना मारना दुशवर कर देते
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इस दिल ने तुझे चाहा है, इबददात है तू मेरी
नाज़ुक यह दिल है मेरा, रखना हिफ़ाज़त से इसे
यह इश्क़ तुझसे एक वादा है, रूठना न मुझसे कभी
दिल लिया है जान भी ले ले , है तू ही ज़िंदगी मेरी