Showing posts with label सुरेन्द्र कुमार हजारीबाग झारखण्ड दिल्ली. Show all posts
Showing posts with label सुरेन्द्र कुमार हजारीबाग झारखण्ड दिल्ली. Show all posts

Sunday, 1 July 2012

जीवन एक यात्रा है और हम सब यात्री !

नमस्ते ! मै सुरेन्द्र !
जीवन एक यात्रा है और हम सब यात्री !
इस यात्रा में यात्री मिलेंगे कुछ दोस्त बन कर यात्रा पूरा करेंगे तो कुछ एक छोटी सोच को लेकर मतलब झगड़कर के लेकिन यात्रा तो सब का पूरा होता है यात्रा के बाद जो बदलाव होता है वो होता है जीवन में की गयी कमाई ! जब हम यात्रा में बस दो पल के लिए एक दुसरे से मिलते है तो फिर हम दोस्त बन कर कियो नहीं रह सकते है इस दो पल में
क्योकि आज जरूरत है दोस्त बन के रहने की,  झगड़कर किसी का उनती नहीं हो सकता है

 
जीवन की इस यात्रा में सब से दोस्त बन के मिलो दोस्त बनाने से किसी को किसी तरह का समस्या नहीं होता है हर एक नए दोस्त एक नयी जीवन का बिचार देता है एक बिछड़ता दोस्त आनुभव देता है लेकिन कपटी दोस्त सीख !

"किसी ब्यक्ति का संस्कार ही दिखता है  समाज में की कोन कितना अच्छा है"

Wednesday, 2 May 2012

खुदा की नेमत !

जिंदगी
प्यार जैसा खूबसूरत अहसास हर किसी की जिंदगी को कुछ स्पेशल बना देता है. जब दो चाहने वाले एक-दूसरे से अपनी भावनाओं का इजहार करते हैं.

हालांकि इस दौड़ भाग की जिंदगी में हमें एक दूसरे के साथ बिताने के लिए वक्त ही नहीं मिल पाता,ऐसे समय में हमें चाहिए कि हम छोटी छोटी चीजों में खुशियां ढूंढे और अपने हमसफर को खुश रखने की कोशिश करें. 

यदि प्यार की लंबी जिंदगी चाहते हैं तो कभी भी ऐसा वादा न करें, जो पूरा न कर पाएँ अन्यथा ये  संबंधों में दरार डाल सकता है। जब  समय अच्छा हो तो  किसी भी तरह का कोई वादा कर लेते हैं लेकिन हो सकता है कि जो वादा  प्रिय से कर रहे हैं, किसी कारण से उसे पूरा न कर पाएँ। इसलिए जहां तक हो सके वादा न ही करें।

और फिर प्यार तो प्यार है, खुदा की सबसे बड़ी नेमत...यहाँ कहाँ किसी वादे या वादाखिलाफी के लिए कोई जगह है। अगर यहाँ कुछ है तो सिर्फ मोहब्बत....।  

Friday, 23 December 2011

थोड़ी देर में


सच्चा प्रेम व्यक्ति को बहुत मुश्किल से मिलता है लेकिन अगर किसी के जीवन में सच्चे प्रेमी का अगमन हो जाता है तो इससे बेहतर और कुछ नहीं है लेकिन वर्तमान हालातों में सच्चा प्रेम जैसी परिस्थितियां बन पाना थोड़ा कठिन हो गया है देखा जाता है कि युवा अपने आकर्षण को ही प्रेम संबंध मानकर साथ जीने-मरने की कसमें खा लेते हैं कुछ समय तो सब कुछ ठीक चलता है लेकिन बाद में सुनहरे सपने बेमानी लगने लगते हैं. जैसे-जैसे आकर्षण समाप्त होने लगता है या कोई बेहतर विकल्प दिखाई देता है तो दोनों में से एक अपने संबंध के प्रति लापरवाह हो जाता है इसके पीछे उसका उद्देश्य जल्दी से जल्दी संबंध और साथी से छुटकारा पाना होता है.

संबंध को समाप्त करने से पहले वह एक बार भी दूसरे के विषय में नहीं सोचता है लेकिन अपने संबंध को लेकर जो व्यक्ति सच में प्रेम करता है वह कभी संबंध विच्छेद को सहन नहीं कर पाता और उसके समीप रहने का हर संभव प्रयत्न करता है.

Thursday, 3 November 2011

प्यार और दर्द


प्यार और दर्द दो ऐसे पहलू हैं जो एक साथ रहते हैं क्योंकि जहां प्यार वहां तकरार और जहां तकरार वहां झगड़ा और दर्द. लेकिन क्या आपको पता है कि अगर आप किसी के प्यार में तीव्र और आवेशपूर्ण भावनाओं और दर्द को अनुभव करते हैं तो ऐसी स्थिति में शायद एक डॉक्टर या दवाई आपके दर्द को कम नहीं कर सकती क्योंकि प्यार तो वह पानी की धारा है जो स्वयं अमृत समान है और अमृत को दवाई की क्या ज़रूरत. प्यार में उत्पन्न दर्द को स्वयं प्यार ही ठीक कर सकता है.

“”यह कुछ मायकुनों में एक लत की तरह लगता है, और प्यार से भी दर्द का इलाज हो सकता है.”